सोमवार, 1 दिसंबर 2025

रात ओढ़े फूलों-सी


रात ओढ़े फूलों-सी, हल्की-हल्की बयार,
हवा में घुलती यादों का बजता है झंकार।।

छूकर गुज़रे ख़्वाबों में, तेरी वो चांदनी,
मन कहे बस पास आ, दूरी अब ना रही।
दिल की धड़कन बोले, तुझपे ही है ऐतबार,
सांसों में बसी तू है, तू ही मेरा प्यार।।

तेरी हँसी में चमकी हैं तारों की कतार,
दिल के इस सागर में तू ही है पतवार।
सपनों की राहों पर संग चलें हम दोनों,
चाहत के इस मौसम में खिल उठे बहार।।

झील-सी तेरी आँखें, मोती-सा तेरा नूर,
बातें तेरी लगती हैं, जैसे मीठा सुरूर।
महकी-महकी चाहत, बिखरे चारों ओर,
तू मिले तो मिल जाता, दुनिया भर का शोर।।

रात भी कहने लगी, अब तो आ जा करीब,
मुझमें ही खो जाएगा, तेरी यादों का सलीब।
चाँद की बारातें हों, हम दोनों के नाम,
पल-पल तेरी धुन गाए, दिल का यह मयूर।।

तेरी बाहों में सिमटकर, हर लम्हा जीना चाहूँ,
तेरे चेहरे की रोशनी में अपना जहां बसाऊँ।
तेरी धड़कन से मिले जो, वही मेरा सुकून,
तेरे प्यार में खोकर मैं बन जाऊँ तेरे जुनून।।

रात ओढ़े फूलों-सी, हल्की-हल्की बयार,
हवा में घुलती यादों का बजता है झंकार।।

महेंद्र मजबूर ©️®️

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