मेरी आँखों से गिरा आँसू—सवाल-ए-बेवफ़ाई है,
तेरी पलकों से जो टपका वो गवाह-ए-बेवफ़ाई है।
तू गया तो सच कहूँ दिल पर अभी तक है चुभन बाकी,
तेरी यादों का समुन्दर आज राह-ए-बेवफ़ाई है।
तेरे वादों पर यक़ीं था, इश्क़ में हसरतें भी थीं,
वक़्त के हाथों ये सब कुछ बस दास्तान-ए-बेवफ़ाई है।
मेरा रंजिश में भी तेरे नाम का ही ज़िक्र रहता है,
हर एहसास-ए-वफ़ा अब बस फ़साना-ए-बेवफ़ाई है।
तू लौटे भी तो दिल पर फिर वही पड़ जाएगी दरार,
जो टूटा है वो टूटा है—नसीहत-ए-बेवफ़ाई है।
-महेंद्र ‘मजबूर’