शनिवार, 29 नवंबर 2025

बेवफाई

 मेरी आँखों से गिरा आँसू—सवाल-ए-बेवफ़ाई है,

तेरी पलकों से जो टपका वो गवाह-ए-बेवफ़ाई है।

तू गया तो सच कहूँ दिल पर अभी तक है चुभन बाकी,
तेरी यादों का समुन्दर आज राह-ए-बेवफ़ाई है।

तेरे वादों पर यक़ीं था, इश्क़ में हसरतें भी थीं,
वक़्त के हाथों ये सब कुछ बस दास्तान-ए-बेवफ़ाई है।

मेरा रंजिश में भी तेरे नाम का ही ज़िक्र रहता है,
हर एहसास-ए-वफ़ा अब बस फ़साना-ए-बेवफ़ाई है।

तू लौटे भी तो दिल पर फिर वही पड़ जाएगी दरार,
जो टूटा है वो टूटा है—नसीहत-ए-बेवफ़ाई है।

-महेंद्र ‘मजबूर’

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