सोमवार, 10 नवंबर 2025

तुम बनो प्रभात

 तुम बनो प्रभात


जब मन में छाए घने अंधियार,

टूटे सपनों का हो संसार,

तब तुम आना, बन किरण उजाल,

मन को देना नया खयाल।।


तुम बनो प्रभात, ओ स्नेहिल साथ,

अंधेरी रात में, तुम ही तो विश्वास।

तुम बनो प्रभात, ओ मन के पास,

हर पीड़ा में तुम हो आस। 


जब थम जाए जीवन की राह,

ना हो कोई अपना अथवा चाह,

तब तुम बन जाना मुस्कान,

भर देना फिर से अरमान।।


तुम बनो प्रभात, ओ स्नेहिल साथ,

अंधेरी रात में, तुम ही तो विश्वास।

तुम बनो प्रभात, ओ मन के पास,

हर पीड़ा में तुम हो आस। 


जब हर दिशा मौन हो जाए,

दिल में बस सन्नाटा छाए,

तब तुम गुनगुनाना धीरे,

सपनों को जगाना पीरे।।


तुम बनो प्रभात, अमर उजियारा,

जीवन हो फिर से प्यारा।

तुम बनो प्रभात…

तुम बनो प्रभात… 


 #महेंद्र मजबूर ©️®️

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