शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

बाकी तो नहीं

मेरे दिल में तेरी यादों का कोई असर बचा बाकी तो नहीं,

तेरी मोहब्बत की राख में कोई चिन्ह जगा बाकी तो नहीं।

तेरे जाने से टूटी हर आस, हर ख्वाब अधूरा रहा,
इन ख़ामोशियों में कोई पुरानी दुआ बाकी तो नहीं।

तेरी आँखों की गहराई में मेरी साँसें खो गईं,
इस वीराने में कोई तेरी याद बसा बाकी तो नहीं।

हर दर्द मैंने अपने भीतर सहा और संभाला है,
इन अश्क़ों में कोई राहत छुपा बाकी तो नहीं।

तेरी हँसी की हल्की आहट आज भी दिल को छूती है,
इन पलकों में कोई रोशनी जगा बाकी तो नहीं।

हमने जो वादे कभी निभाने की ठानी थी,
इन फासलों में कोई निशां बचा बाकी तो नहीं।

आख़िरी बार पूछ लें दिल से ये सवाल,
तेरे बिना हमारे बीच मोहब्बत बचा बाकी तो नहीं।

तुम्हारे लौटने की राह अब भी वीरान है,
इन रास्तों में कोई ठंडी छाँव जगा बाकी तो नहीं।

जो खोया, उसे यादों में सावधानी से रखा है,
इन लम्हों में कोई ख़ुशी बसी बाकी तो नहीं।

तेरे बिना यह जीवन आधा और सुनसान लगता है,
इस दुनिया में कोई साया, कोई हमसफ़र बाकी तो नहीं।

यादों का सिलसिला अब भी धीरे चलता है,
इन रातों में कोई चिंगारी जगा बाकी तो नहीं।

मेरी तन्हाई अब सिर्फ़ तेरे नाम की गवाही देती है,
इन दीवारों में कोई आवाज़ बाकी तो नहीं।

तूने जो छोड़ दिया, वह दर्द अब तक मेरे साथ है,
इस बिखरे दिल में कोई राहत बची बाकी तो नहीं।

हर साँस में तेरी कमी गहरी तरह महसूस होती है,
इस जीवन में कोई राहत जगा बाकी तो नहीं।

और जब चाँद भी तन्हा आसमान में झिलमिलाता है,
इस दिल की खामोशी में कोई रोशनी बाकी तो नहीं।

महेंद्र "मजबूर"©️®️

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