जीवन
रेत
सा
तुम
मरिचिका
भटकन
दिल
तलाश
प्यास
प्रेम
दूर
धूप
जलन
रेत
अंतहीन
कदम
थके
सांस
रुकी
फिर
खुशबू
हवा
छुई
तुम
उतरी
पलकों
पर
सच
बनी
कंठ
तर
दिल
भरा
धूप
दुलार
रेगिस्तान
मुस्कुराया
ओस
गिरी
नाम
तेरा
जीवन
मिला।
जीवन
रेत
तुम
मरीचिका
दिल
भटका
प्यास
जगी
धूप
चुभी
रेत
झरी
कदम
थके
सांस
रुकी
हवा
बही
खुशबू
आई
तुम
उतरी
नज़र
भीगी
कंठ
तरा
धूप
मुलायम
रेत
गुनगुनी
दिल
हँसा
ओस
गिरी
नाम
तेरा
जीवन
खिला।
महेंद्र 'मजबूर'
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