रविवार, 26 जून 2016

तलाश

जीवन

रेत

सा

तुम
मरिचिका

भटकन
दिल

तलाश
प्यास

प्रेम
दूर

धूप
जलन

रेत
अंतहीन

कदम
थके

सांस
रुकी

फिर
खुशबू

हवा
छुई

तुम
उतरी

पलकों
पर

सच
बनी

कंठ
तर

दिल
भरा

धूप
दुलार

रेगिस्तान
मुस्कुराया

ओस
गिरी

नाम
तेरा

जीवन
मिला।

जीवन
रेत

तुम
मरीचिका

दिल
भटका

प्यास
जगी

धूप
चुभी

रेत
झरी

कदम
थके

सांस
रुकी

हवा
बही

खुशबू
आई

तुम
उतरी

नज़र
भीगी

कंठ
तरा

धूप
मुलायम

रेत
गुनगुनी

दिल
हँसा

ओस
गिरी

नाम
तेरा

जीवन
खिला।

महेंद्र 'मजबूर'


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