सितम जुदाई का सहूँ कैसे,
तु ही बता, तुझ बिन रहूँ कैसे।
हर राह वीरान लगती है,
तेरे बिन ये जहाँ सुना लगता है।
ना पनघट पे रुनझुन पायल की,
ना बसंत में रंग बहारों के,
तेरी यादों का झोंका जब आता,
दिल में लहर सी उमड़ जाती है।
हवा संग आती तेरी महक,
जैसे तू पास खड़ी मुस्काती है,
बंद आँखों में तेरा चेहरा उभरता,
और आँसू छलक ही जाते हैं।
अब लौट आ, ना देर कर,
तेरे बिन सांसें भी थम जाती हैं।
तु ही बता, ओ प्राण मेरे,
तुझ बिन ये जिंदगी चले कैसे...
मजबूर
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