कलम हाथ ले चंद अल्फ़ाज़ लिखता हूँ।
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
ख्वाहिशो के समंदर मे
हकीकत के दो शब्द
तुझ संग बिताए जो पल वो पल लिखता हूँ।
तुझ से बिछडना और
तुझे मेरी याद ना आना
ऐसे कई अनगिनत सवाल लिखता हूँ।
कलम हाथ ले चंद अल्फ़ाज़ लिखता हूँ।
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
जब छू गया था लब मेरे तू
बे जबान तब से लिखता हूँ।
कभी राझना कभी महीवाल कभी मजनुँ लिखता हूँ
प्यार के तराने है कुछ ऐसे जनाब की
आँसुओं कि स्याही से उनका दीदार लिखता हूँ।
जाने क्यो छोड जाते सब मुझे
भीगी मुस्कान से तन्हाई लिखता हूँ।
कलम हाथ ले चंद अल्फ़ाज़ लिखता हूँ।
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
महेंद्र " मजबूर "
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
ख्वाहिशो के समंदर मे
हकीकत के दो शब्द
तुझ संग बिताए जो पल वो पल लिखता हूँ।
तुझ से बिछडना और
तुझे मेरी याद ना आना
ऐसे कई अनगिनत सवाल लिखता हूँ।
कलम हाथ ले चंद अल्फ़ाज़ लिखता हूँ।
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
जब छू गया था लब मेरे तू
बे जबान तब से लिखता हूँ।
कभी राझना कभी महीवाल कभी मजनुँ लिखता हूँ
प्यार के तराने है कुछ ऐसे जनाब की
आँसुओं कि स्याही से उनका दीदार लिखता हूँ।
जाने क्यो छोड जाते सब मुझे
भीगी मुस्कान से तन्हाई लिखता हूँ।
कलम हाथ ले चंद अल्फ़ाज़ लिखता हूँ।
कभी आँसु कभी मुस्कान लिखता हूँ।
महेंद्र " मजबूर "
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